पर्यटको से गुलजार रहने वाले पर्यटक स्थलो से भीड़ गायब

पर्यटको से गुलजार रहने वाले पर्यटक स्थलो से भीड़ गायब
पोखरा के फेवा ताल में खड़ी नाव

वीरगंज (नेपाल)  : नेपाल की पर्यटन राजधानी और नेपाल का स्वीजरलैंड कहे जाने वाले पोखरा के फेवा ताल (पोखर का नेपाली नाम) में खड़ी नावे कोरोना महामारी के चलते हुए नुकसान की कहानी कह रही है। जनवरी से लेकर जून तक महिने में जहां नेपाल के सभी पर्यटन स्थलो पर पर्यटको की भारी भीड़ होती थी।


पर्यटको से गुलजार रहने वाले पर्यटक स्थलो से भीड़ गायब

वहां पर सन्नाटा छाया हुआ है। खासकर पोखरा जहां पर नेपाल और भारत ही नहीं विश्व के कई देशो से पर्यटक आते है। नेपाल के पर्यटन स्थलो में पोखरा का एक खास स्थान है। इन सब के बीच लंबे लॉकडाउन के कारण यहां पर्यटक नहीं पहुंच रहे है। पोखरा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पर्यटन उद्योग पर टीकी है, ऐसे में पर्यटको के यहां नहीं पहुंचने के कारण इस व्यवसाय से जूड़े लोगों के सामने खाने पीने की समस्या आ रही है। एक होटल व्यवसायी सुदीप पौडेल ने चंपारण टूडे को बताया कि अगर आज की तारिख में लॉकडाउन हट भी जाता है तो पर्यटन व्यवसाय को पटरी पर आने में काफी वक्त लगेगा।


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काफी धूमधाम से इस साल नेपाल पर्यटन वर्ष मना रहा था कि पूरे विश्व से करीब 20 लाख पर्यटको को नेपाल लाया जाए, लेकिन कोरोना के कारण अब यह संभव होता नहीं दिख रहा है। नेपाल के साथ-साथ नेपाल के अन्य पर्यटन स्थल मनोकामना, नारायणघाट, दामन, लुम्बिनी, काठमांडू, नागरकोट, गोरखा आदि का यही हाल है। इस पूरे लॉकडाउन के कारण अरबो का नुकसान केवल पर्यटन व्यवसाय से हुआ है।