अपने शानदार विरासत को खोता शिक्षक दिवस- बंदना सिंह

अपने शानदार विरासत को खोता शिक्षक दिवस- बंदना सिंह

--गुरु महर्षि धौम्य एवं शिष्य आरूणि से लेकर सर्वपल्ली डा० राधाकृष्णन के रास्ते इसे आगे बढ़ाया जा सकता--
 

गुरू महर्षि धौम्य एवं शिष्य आरूणि से लेकर डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शानदार परम्परा के वाहक शिक्षक दिवस आज एसी कमरे में बैठकर, केक काटकर गीत-गाना गाने, डांस करने, पुरस्कार लेने- देने, हैप्पी टीचर्स डे कहकर सेलिब्रेट करने मात्र का दिवस बनकर रह गया है. ये बातें शिक्षक दिवस पर एक आलेख के माध्यम से शहर के संत पाल स्कूल की एमए-बीएड शिक्षिका सह महिला संगठन ऐपवा जिलाध्यक्ष बंदना सिंह ने कहा.  उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस बेहतर शिक्षा के माध्यम गुरू-शिष्य परम्परा को मजबूत एवं निर्वाह करने का संकल्प दिवस है. शिक्षा हमारे अंदर के अंधेरा को दूर कर प्रकाश फैलाता है. यह विश्व का सबसे सशक्त माध्यम है. इसे तमाम ग्रंथों में भी स्थान दिया गया है. सामान्य आदमी से लेकर राजे- रजवाड़े ने इसे सर्वोत्तम माना है. लेकिन आज यह शानदार परम्परा समाप्ति के कागार पर है. आज सरकारी नीति के कारण शिक्षक को सम्मान के बदले अपमानित होना पड़ता है. कारपोरेट घराने से लेकर स्कूल का निजीकरण ने इसे चौपट करके रख दिया है. आज 5-6 हजार में निजी विद्यालय शिक्षक रखकर शिक्षक एवं छात्रों के भविष्य से भी खिलवाड़ करने लगे है. दिन भर स्कूल में सेवा देने के बदले मिला राशि से शिक्षक तक का परिवारिक खर्च भी पूरा नहीं हो पाता. नई शिक्षा नीति में इसे जगह भी नहीं दिया गया है.
श्रीमती बंदना सिंह ने इस दुर्व्यवस्था के लिए सरकार, छात्र, अविभावक के साथ स्वयं शिक्षक को भी दोषी माना है. आज निजी स्वार्थ के कारण निजी विद्यालय, कोचिंग, कालेज आदि संस्थाओं के संचालक, शिक्षक शिक्षा एवं शिक्षक को सम्मानित करने के बजाए अपने संस्थाओं को चमकाने के लिए संस्थान के अंदर केक काटने, गीत- गाने, डांस से लेकर सेलिब्रेट करने तक सिमट कर रख दिया. बच्चे के अनुशासन पर उनका तनिक भी ध्यान नहीं होता. यूँ कहें तो यह फूहड़ता की ओर बढ़ चला है. यही कारण है कि शिक्षक दिवस पर छेड़खानी तक की घटनाएं सामने आती रही हैं. शिक्षिका श्रीमती बंदना ने कहा कि हमें फिर से गुरू महर्षि धौम्य  और शिष्य आरुणि से लेकर शिक्षक से राष्ट्रपति बने डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शानदार परम्परा को आगे बढ़ाने का चुनौती स्वीकारना होगा. इसके लिए उन्होंने स्कूल, कालेज, कोचिंग आदि संस्थानों में नैतिक शिक्षा की पढ़ाई को अनिवार्य करने की मांग की ।