आयुष्मान का मिला संग तो टुनटुन के खिलने लगे जीवन के रंग 

आयुष्मान का मिला संग तो टुनटुन के खिलने लगे जीवन के रंग 

 
वैशाली,
दिहाड़ी और मजदूरी करने वाले रकसाल गंज निवासी 31 वर्षीय टुनटुन के लिए वह दिन भी काली स्याह रात जैसी लग रही थी जब उसे पता चला कि उसे स्टेज टू का मुंह का कैंसर है। अब उसे अपने परिवार की ज्यादा चिंता हो रही थी। कुछ वर्ष पहले ही तो उसकी शादी हुई थी। अब तो उसे एक बेटा भी था। वहीं दूसरी ओर उसके सामने आजीविका का भी संकंट मंडरा रहा था। हिम्मत जुटा कर उसने एक नामी अस्पताल में इलाज कराना शुरू किया। कुछ दिन में उसने अस्पताल के खर्चों के सामने घुटने टेक दिए। अब उसके पास एक विकल्प महावीर कैंसर संस्थान था। वहां जाने पर भी उसे जो खर्च बताया गया वह उसे पूरा करने में असमर्थ था। यह बताने पर उसे वहां आयुष्मान कार्ड के बारे में बताया गया। टुनटुन वहां से सीधे अपने घर रकसालगंज, हाजीपुर आ गया। जहां उसने सदर अस्पताल में आयुष्मान कार्ड बनवाया और अपना इलाज कराना शुरू किया।टुनटुन बताते हैं मुझे सबसे पहले मुंह में छोटे -छोटे जख्म हुए। जब थोड़ी दिक्कत हुई तो डॉक्टर के यहां दिखाने गया। जांच में पता चला कि मुझे स्टेज टू का मुंह का कैंसर है। आयुष्मान कार्ड बनवाने के बाद महावीर कैंसर संस्थान में गया जहां लगातार तीन महीने तक मेरा इलाज हुआ । इस दौरान कीमो थेरेपी और अन्य उपचार भी हुआ। तब कहीं जाकर आज बोलने की स्थिति में हूं। अभी तक आयुष्मान के माध्यम से करीब 2 लाख का इलाज हो चुका है। अगर अभी और इलाज की जरूरत पड़ेगी तो अभी भी मैं इसके माध्यम से इलाज करा सकता हूं। वहीं जांच के लिए सदर अस्पताल में मुझे सारी सुविधाएं भी मुफ्त में मिलती हैं। आयुष्मान के बारे में भावुक होते हुए टुनटुन कहते हैं कि हम जैसे पैसे से असहाय लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड और यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। अगर मेरी जान किसी ने बचायी है तो वह आयुष्मान कार्ड की योजना ही है। मेरे जीवन में अगर आयुष्मान का संग न होता तो मेरे जीवन में कोई रंग न होता।