बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के साथ बैठने वाला यह व्यक्ति कौन था? ..पढ़ें।>>

बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के साथ बैठने वाला यह व्यक्ति कौन था?  ..पढ़ें।>>

एक ऐसा शख़्स जिसने फ़क़ीरी और दरवेशी में अपनी ज़िंदगी गुज़ार दी, जिसका टूटा फूटा मकान था जिसमें टाट का पर्दा लगा रहता था। जिसके पास एक मैला-कुचैला थैला रहा करता था। उस थैले में फटे पुराने कपड़े, एक लोटा और चंद कागज़ात रहा करते थे। जो शख़्स जब संविधान सभा की बैठक में आता तो संसद के सामने एक टूटी सी मस्जिद में अपना क़याम करता। वो शख़्स जिसने कभी संसद से तनख़्वाह या कोई भी सरकारी सहूलियत नहीं लिया। 


यह भी पढ़े : राज्यसभा चुनाव : हरिवंश एंव रामनाथ ठाकुर दोबारा जाएंगे राज्यसभा, जेडीयू ने किया ऐलान।

वो शख़्स जिसने "इंक़लाब ज़िंदाबाद" का नारा दिया, जिसने सम्पूर्ण आज़ादी का नारा बाबुलंद लगाया। जिसने अपनी ज़िंदगी के छः साल इसलिए जेल में गुज़ार दिया ताकि आने वाली नस्लें एक आज़ाद और ख़ुदमुख़्तार मुल्क में सांसें ले सकें। 

वो शख़्स क्या नहीं था। कभी आलिम बनकर, तो कभी शायर बनकर, मुजाहिद ए आज़ादी बनकर, तो कभी क़ायद बनकर मुल्क और इंसानियत की बेलौस ख़िदमत किया। जिसकी शायरी और ग़ज़लें आज भी रूह को ताज़ा कर देती हैं। 


यह भी पढ़े : प्रधानमंत्री का देश के नाम खुला ख़त, पूरा पढ़ें

वो शख़्स जो क़ौमी एकता का सच्चा सिपाही था जिसने हमेशा हिंदू-मुस्लिम इत्तेहाद की बात की। जिसने इंसानियत को हमेशा सियासत से ऊपर रखा। जिसे किसी भी पद की कोई ख़्वाहिश नहीं रही। 

अम्बेडकर का वो साथी जिनके साथ अम्बेडकर दस्तरखान पर साथ बैठकर खाना खाते थे।


यह भी पढ़े : विपक्षी दलों ने की दिल्ली हिंसा की न्यायिक जांच की मांग, गृह मंत्रालय और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल।

उस अज़ीम शख़्स का नाम "मौलाना हसरत मोहानी" था।